हसरत है बन सकूँ एक रास्ता खुदी का......
अरमान सुलगते दिल में बदलने को सब कुछ
"विषमता से परिपूर्ण सामाजिक संरचना"
हसरत है लिख सकूँ मैं मुकद्दर जहाँ का
के आगे मुकद्दर के मुझको झुकना नहीं दोबारा......
A cathartic expression of myself to me...
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