यादें भी क्या ख़ूब मज़ा लेती हैं
जीने वाले को मार देती हैं
, और दफ़्न रूह को उठा देती हैं
वो कहते थे की क़यामत आने तक नहीं भूलेंगे
और जब क़यामत आ ही गयी
, कुछ और न किया
एक याद बन गए
….
---रुहदार
A cathartic expression of myself to me...
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