अंतिम अभिलाषा
तुम्हारे अश्को को हर एक गम को मैं पी लूं
चाहता हूँ एक पल ऐसा जैसा मैंने कभी नहीं पाया
जिसमे मैं तुम्हे जान सकूँ , पहचान सकूँ
तुम्हारा सच , तुम्हारी आत्मा को........
ज़िन्दगी एक काश बनकर रह गयी
उस घरौंदे को रौंद कर जो मेरे स्वप्नों से बुना था
चाहता हूँ तुम्हे दे दूं वही घरौंदा, हर वो स्वप्न ......
अकेला, साथ तुम्हारे महसूस करना चाहता हूँ..
चाहता हूँ तुम्हे कुछ दूं कुछ ऐसा जैसा तुमने कभी नहीं पाया
ह्रदय भी दे दूं वो भी कम है .....

No comments:
Post a Comment